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तुम्हारी झील सी आँखें मुझे घायल बनाती हैं, तस्वीर को देख क़लम ख़ुद ग़ज़ल बनाती है। क़ुदरत की क्या तारीफ़ करूँ तुम्हारे सामने, तुम्हारी यही सादगी तो मुझे पागल बनाती है। ...